कॉर्बेट के गर्जिया जोन में वाइल्ड एडवेंचर का आनंद कम रोमांचक नहीं

जिम कॉर्बेट से संतोष कुमार तिवारी की विशेष रिपोर्ट

बहुधा ऐसा होता है आप जहाँ निवास या नौकरी कर रहे होते हैं, उस स्थान की विशिष्टता से प्राय: उदासीन रहते हैं, परंतु बात जब जिम कॉर्बेट के परिक्षेत्र में रहते हुए वाइल्ड एडवेंचर की हो तो भला कौन नहीं तैयार हो जायेगा |
आज राइका ढिकुली का अधिकांश स्टाफ दो जिप्सियों में नवनिर्मित गर्जिया जोन भ्रमण पर था|
ऐसे कई अवसर आये जब
जंगल तथा वन्यजीवों को बेहद निकट से देखने-समझने का वक्त मिला| एक बड़ी बात और, जब – जब जंगल घूमने का सौभाग्य मिला वह पहले की अपेक्षा अधिक नित्यनूतन, रमणीय और चित्ताकर्षक दिखी|

पर्यटननगरी रामनगर में जिमकॉर्बेट पार्क जिसे सीटीआर(कॉर्बेट टाइगर रिजर्व) कहते हैं , का अद्भुत वैभव उसकी वैविध्यवर्णी वनसंपदा भी है| बाघ, हाथी, चीता , हिरन, चीतल , भालू , जंगली बिल्ली सहित अन्य वनपशु और पंछी लंबे पीले चोंच वाली चिड़िया हार्नविल, ब्राउन इगल व अन्य मेहमान पक्षी , जो कुछ महीने कॉर्बेट के आकर्षण का केंद्र होते हैं, जिनके कलरव से पूरा वनक्षेत्र गुंजार करता है |जानकारों का मानना है कि रंगबिरंगी तितलियों की एक पूरी मुकम्मल दुनिया इसी कॉर्बेट में देखने को मिलती हैं|
यहाँ जामुन, खैर, शाल आँवला, बहड़, सागौन, तेंदू के पेड़ व विभिन्न वनस्पतियों / वनौषधियों की गंध मानों सीधे चेतना को झंकृत करती प्रतीत होती है| लैन्टाना (अमेरिकन घास) , गाजर घास, बिच्छू घास, एलीफैंट ग्रास के घेरे और मैदान देखने तो आपको कॉर्बेट ही आना पड़ेगा|
करीब पैंतीस किमी आने-जाने की दूरी, जिनमें कई खतरनाक मोड़, खड़ी चढ़ाई , पारंपरिक जलस्रोत
से होते हुए हिचकोले खाती जिप्सी कब भ्रमण करवाकर लौट आई , समय का आभाष भी नहीं हुआ|
मन बार – बार प्रकृति की अनुपम धरोहर कॉर्बेट के सैर की बनी रहती है, वह ऐसे ही नहीं|
एक ओर जहाँ पहाड़ का अपना विस्तृत वैभव है, देवभूमि विभिन्न नदियों का पावन उद्गम है, हिमालय दर्शन का सनातन आनंद है; तो वहीं राजाजीनेशनल पार्क और जिमकॉर्बेट पार्क टूरिज़्म के स्थापित स्तम्भ और आर्थिकी के स्रोत हैं |

तो आप जिम कॉर्बेट कब आ रहे ? बस ध्यान यह रखिये कि मध्य जून से मध्य सितंबर के बीच कॉर्बेट भ्रमण
की योजना न बनायें वही बेहतर होगा, क्योंकि वर्षाकाल में पर्यटकों के लिए यह बन्द रहता है|
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संतोषकुमार तिवारी राइका ढिकुली में हिन्दी प्रवक्ता हैं |
यह फीचर उन्होंने ही लिखा है| लेखक ने भ्रमण के विभिन्न पहलुओं को इस प्रकार रेखांकित है मानों आपकी ही आँखों से वह देख रहा हो|

santoshtiwari913@ gmail.com

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