ट्राइफेड : आदिवासियों के लिए संजीवनी बन कर उभरी ये योजना

जनजातीय कार्य मंत्रालय

ट्राइफेड का विलेज और डिजिटल कनेक्ट – आदिवासी लोगों के साथ संपर्क की स्थापना

प्रविष्टि तिथि: 17 FEB          by PIB Delhi

जनजातीय मामलों के मंत्रालय के तत्वावधान में पिछले एक वर्षमें ट्राइफेड ने महामारी के कारण गंभीर रूप से प्रभावित होकर परेशानी मेंघिरे आदिवासियों की आजीविका में सुधार करने में मदद करने के लिए अनेकशुरुआतें लागू की हैं । यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह पहल आदिवासियों तकपहुंचे और उन्हें मौजूदा योजनाओं और पहलों से लाभान्वित किया जा सके, देशभर में ट्राइफेड के क्षेत्रीय अधिकारी पूरे देश में महत्वपूर्ण जनजातीयआबादी वाले गांवों की पहचान करेंगे और दिनांक 31 मार्च, 2021 तक वहां अपनाआधार स्थापित करेंगे । ज़मीनी स्तर पर मौजूद होने से ट्राइफेड के अधिकारियोंको इन कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की निगरानी करने और आदिवासी भाइयों का सशक्तिकरण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

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‘गो वोकल फ़ॉर लोकल’ के आधार पर ‘गो वोकल फ़ॉर लोकल गो ट्राइबल-मेरा वन मेरा धन मेरा उद्यम’ का सिद्धांत अपनाते हुए मौजूदा कार्यक्रमोंके अतिरिक्त अनेक पथप्रदर्शक शुरुआतें आदिवासियों के लिए संजीवनी बन करउभरी हैं ।

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इन पहलों में वन धन जनजातीय स्टार्ट-अप और न्यूनतम समर्थनमूल्य (एमएसपी) के माध्यम से एमएफपी के विपणन की प्रणाली तथा लघु वनोपज (एमएफपी) के लिए मूल्य श्रृंखला का विकास जैसी योजनाएं शामिल हैं जो वनउत्पादों के संग्रहकर्ताओं को एमएसपी की सुविधा प्रदान करती हैं, साथ हीजनजातीय समूहों के माध्यम से मूल्य संवर्धन एवं विपणन जिसको समूचे देश मेंव्यापक स्वीकृति प्राप्त हुई है।

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न सिर्फ जनजातीय वाणिज्य को बढ़ाने के लिए बल्कि गांव आधारितजनजातीय उत्पादकों और कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले अत्याधुनिकई-प्लेटफॉर्म्स की स्थापना के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीयबाजारों से मैप एवं लिंक करने के लिए सभी कुछ समेटे एक डिजिटलीकरण अभियानभी शुरू किया गया था।

ट्राइफेड ने वनधन योजना, ग्रामीण हाट, वनवासियों के गोदामोंसे संबंधित सभी सूचना को वन धन एमआईएस पोर्टल में डिजिटलीकृत कर दिया है ।डिजिटलीकरण के इस प्रयास का, जिसमें जीआईएस तकनीक के माध्यम से सभी जनजातीयक्लस्टर्स की पहचान एवं मैपिंग की गई है, उनका ग्राम कनेक्ट के इस चरण केदौरान लाभ उठाया जाएगा । ट्राईफेड के अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि सभीजनजातीय उत्पादकों और समूहों को इन डिजिटल प्रणालियों में मैप किया गया हैऔर अन्य मंत्रालयों और एजेंसियों के साथ समन्वय से उपलब्ध सभी लाभ प्राप्तकरेंगे । गांवों को इस पोर्टल से जोड़ा जाएगा।

इसके अलावा, ट्राईफेड ने एमएफपी, हस्तशिल्प और हथकरघा कीऑनलाइन खरीद की सुविधा के लिए जनजातीय उत्पादकों-वनवासियों और कारीगरों केलिए एक बाजार भी शुरू किया है । धीरे-धीरे देश भर में 5 लाख आदिवासीउत्पादकों को उनकी प्राकृतिक उपज तथा उनके दस्तकारी के सामानों को बाज़ार सेजोड़ा जा रहा है । जमीनी स्तर पर ट्राइफेड अधिकारियों की उपस्थिति से यहअपेक्षा की जाती है कि जनजातीय कारीगरों को पर्याप्त रूप से सूचित कियाजाएगा और उनकी मदद की जाएगी ताकि वे बड़े बाजारों तक अधिक पहुंच प्राप्त करसकें और इस प्रकार उनकी आय में सुधार हो सके।

उम्मीद है कि ट्राइफेड के गांव और डिजिटल कनेक्ट के इस चरण सेअगले वर्ष में सभी नियोजित पहलों के सफल कार्यान्वयन में काफी सहायतामिलेगी और देश भर में जनजातीय पारितंत्र में पूर्ण परिवर्तन होगा।