हुआ सवेरा कोयल कूके,कण- कण होते लाल

🙏होली की शुभकामनाएं🙏

पुरवा महके, पछुआ महके, महक उठे दशों दिशाएं ।
महके कलियां गली-गली , कलियन भंवरे मंडराएं।।
हुआ सवेरा कोयल कूके,कण- कण होते लाल।
ताक-झांक छांडि सुवर्णी, नयन होत बेहाल।।
बगियों का गुलजार देख, भंवरा करै गुंजार।
देख परदेशी पास अति, घुंघटा दियै उघार ।।
सांस- सांस ढोलक बाजे,मन ही मन मृदंग।
भेद भाव से ऊपर उठकर, होने लगें इक रंग ।।
भंवरे छू कलियों के गात, कहने लगे एकहि बात।
जन जन मा मधुमास रहें, रास रंग हों दिन-रात।।
जले सदा हृदय कलुष, बुराइयों का नाश हो।
होलिका हवस में जले, सशक्त प्रहलाद हों।।

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ऋतु बसंत में आने वाली,
होली बहुत निराली है।
बालक वृद्ध जवान सभी को,
हृदय से भाने वाली है।।
आपस में सब मिलजुल करके,
प्रेम से अबीर-गुलाल लगाएं।
बीती हुई बातों को भूल,
आपस में सद्भाव बढ़ाएं।।
प्यार की बोली बोल-बोल कर,
सबसे अपना प्रेम बढ़ाएं।
कोरोना से डरें नहीं,
बस अभिवादन से काम चलाएं।।
कोरोना को दूर भगाने,
हेतु सदा ही मास्क लगाएं।
निश्चित दूरी बना के रखें,
साफ-सफाई खूब अपनाएं।।
होली बीत जाने पर भी,
न गले मिलें न हाथ मिलाएं ।
दिल में छुपे सौहार्द्र भाव को, जगा-जगा कर काम चलाएं।।
आरोग्य ऐश्वर्य से युक्त रहें, मनभावन होली मन से मनाएं।
छोटे-बड़े का भाव न रखें,
हंसें और सबको भी हंसाएं।।
टेंशन अशुभ विचार जलाकर, खुशहाली का रंग लगाएं।
आप और परिवार आपके,
सबको होली की शुभकामनाएं।।
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राजेन्द्र दुवे
नागपुर महाराष्ट्र
9764713736