तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु : तुझे मेरी मोहब्बत का भला एहसास कैसे हो , अभी पतझड़ नहीं आया मधुर मधुमास कैसे हो

-चर्चित कवियों का  ऑनलाइन कवि सम्मेलन 

अयोध्या l पाबंदियों में भी एक शख़्स यह काम करता है ! दूर से ही सही सबको दुआ सलाम करता है !! चर्चित कवि व मंच संचालक तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु का यह शेर लॉक डाउन पीरियड में हो रहे ऑनलाइन कवि सम्मेलनों पर सटीक बैठता है ! कहते हैं कि आदमी अपनी शौक पूरी करने का बहाना ढूंढ लेता है ! ऐसा ही हो रहा है लॉक डाउन पीरियड में हो रहे ऑनलाइन कवि सम्मेलनों के साथ ! कादंबरी साहित्य परिषद चिरमिरी छत्तीसगढ़ द्वारा वरिष्ठ कवि नरेंद्र मिश्र धड़कन के संयोजन में अखिल भारतीय ऑनलाइन कवि सम्मेलन आयोजित हुआ

तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु की अध्यक्षता तथा कवि विनोद नयन के संचालन में कवियों ने देश दुनिया के मौजूदा हालात तथा अन्य ज्वलंत समस्याओं को अपने गीत , ग़ज़ल , दोहे , शेर व मुक्तक द्वारा प्रस्तुत किया ! कार्यक्रम का शुभारंभ जबलपुर की प्रख्यात कवयित्री डॉक्टर रानू रूही द्वारा प्रस्तुत मां वीणा की वाणी वंदना -” मां तू ही है स्वर की वेदी , जग का करती है उद्धार ! तेरा ही सब नाम जपते , करते जय-जय कार !! कटनी मध्य प्रदेश के कवि सतीश आनंद ने पढ़ा — ” मेरे क़त्ल की साजिश में उनका ही नाम आया ! जिन दोस्तों पर मेरे एहसान बहुत हैं !! कोरबा छत्तीसगढ़ की कवयित्री अंजना सिंह ने पढ़ा — ” उनके दीदार की तारीख अब लंबी हो गई है ! लॉक डाउन की अवधि अब तीन मई हो गई है !! अतुल उपाध्याय ने पढ़ा — देश की देहरी का निवेदन यही ! प्राण का प्राण को आचमन है प्रिये !! डीपी लहरे ने पढ़ा — है अज़ा बेहद कहूं क्या हाल भी बेहाल है ! दौरे – मुश्किल में वतन ये दुश्मनों की चाल है !! सतीश उपाध्याय ने पढ़ा — उस पर शायद भारी आफत थी ! इसीलिए उसको भगवान से शिकायत थी !! इसराइल खान ने पढ़ा — कुछ बात ऐसी हो रही है , कथित संवेदना सो रही है ! रूंधे गले से स्वर साधे , व्यथित वेदना रो रही है !! कार्यक्रम के समीक्षक राजकुमार महोबिया ने पढ़ा — देह कंचन तृप्ति की गंगा नहाई रात भर ! मांग कुंवारी प्रीत ने रोली सजाई रात भर !! विनोद नयन ने पढ़ा — आंखों में अपनी प्यार के दीपक जलाइए ! दिल में हजार ग़म हों मगर मुस्कुराइए !! नरेंद्र मिश्र धड़कन ने पढ़ा — चलती नहीं पुरवाईयां धड़कन के शहर में ! बजती नहीं शहनाइयां धड़कन के शहर में !! तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु ने पढ़ा — तुझे मेरी मोहब्बत का भला एहसास कैसे हो , अभी पतझड़ नहीं आया मधुर मधुमास कैसे हो ! कभी निर्धन की बस्ती में चले आओ समय लेकर , तो सोचोगे कि मेरे चेहरे पर उल्लास कैसे हो !! जयप्रकाश नागला , अवधेश अवस्थी , आशीष तिवारी निर्मल , राजेंद्र धुरंधर आदि कवियों ने भी कविताएं पढ़ी ! ऑनलाइन श्रोताओं ने भी कविता का आनंद लिया तथा अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की ! अंत में संयोजक द्वारा सभी का आभार प्रकट करते हुए कार्यक्रम का समापन हुआ !

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