जब भारत विश्व योग दिवस के लिए 177 देशों का समर्थन हासिल कर चुका है तो हिंदी को संयुक्त राष्ट संघ की मान्य भाषा बनाने के लिए मात्र 127 देशों की सहमति में दिक्कत कहां आ रही ?

संतोष कुमार तिवारी

हिन्दी दिवस मनाये जाने की निंदा नहीं करता ,परंतु समर्थन भी नहीं| आखिर हिंदी कब तक अपने हक-हुकूक के लिए लड़ती रहेगी| सवाल है जब भारत विश्व योग दिवस के लिए 177 देशों का समर्थन हासिल कर चुका है तो हिंदी को संयुक्त राष्ट संघ की मान्य भाषा बनाने के लिए मात्र 127 देशों की सहमति में दिक्कत कहां आ रही?
दुनिया में छह हजार से ज्यादा बोली व भाषाएँ हैं|
प्रयोग की उदासीनता की वजह से जानकारों का मानना है कि इक्कीसवीं सदी के अंत तक नब्बे फीसद बोली व भाषाएं लुप्त हो जायेंगी|इस लिहाज से नयी शिक्षा नीति 2020 में स्थानीय भाषाओं को तरजीह दिये जाने की पैरवी
सराहनीय है|
गौर करने लायक बात तो यह है कि भारत में हिंदी के उत्थान के ज्यादातर आंदोलन उन लोगों ने चलाया जो अहिंदी भाषी थे|
आज के समय में भाषाज्ञानियों की जिम्मेदारी बढ़ी है कि वे तमिल ,बांग्ला,गुजराती ,असमिया,डोगरी पर कार्यशाला चलायें और इन भाषाओं के उपयोगी शब्दों को चुनकर हिंदी में शामिल करें| जीवन में चेतना बरकरार रखने के लिए भाषा की चेतना का बना रहना अपरिहार्य है|
अमेरिका जैसे देशों में आज हिंदी उपन्यासों की धूम है| दिन प्रतिदिन वहां हिंदी बोलने वालों की संख्या मे इजाफा हो रहा है|अंग्रेजी के अखबारों का दायरा घटा है, जबकि हिंदी के अखबार फलफूल रहे हैं-ये बातें इशारा करती हैं कि हिंदी की स्थिति बेहतर हुई है|
बड़े प्रकाशक अब साल भर में काफी बड़ी संख्या में हिंदी की पत्रिकाएं व किताबें छाप रहे हैं|
लोग इंटरनेट पर हिंदी शब्दकोश और साहित्य की पुस्तकें खूब पढ़ रहे हैं | सोशल मीडिया (फेसबुक, ट्वीटर, व्हाट्सअप, इंस्टाग्राम आदि) पर युवा हिंदी मेम संवाद कर रहे हैं|
हर साल होने वाले विश्व हिंदी सम्मेलन में हिंदी की
व्यापकता पर बड़े बृहद स्तर पर कार्ययोजना बनायी जाती है|
तो अब आखिर हिंदी को लेकर किस बात की द्विविधा, कैसा रोना| इन दिनों हिंदी अपने उत्कर्ष काल में है|
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पेशे से अध्यापक व भाषाविद् संतोषकुमार तिवारी राइका ढिकुली में हिंदी के प्रवक्ता हैं|
आपकी दो किताबें छप चुकी है| रामनगर, नैनीताल में रहते हैं|
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Mail : santoshtiwari913@gmail.com

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